Thursday, December 22, 2011

सर्दी, इस मौसम......

१.
 धुप या न होना इसका,
उदास कर जाता है.
मन टटोलने लगता/ जगह खाली पासंग......

२.

ऊंचे बित्ता भर/
birawe    
फूटी बाली

मन करता है/
रूक जाऊं/
इन्हें पकने तक...

३.

रात अकेली, नीरव/
शोर केवल कुहरे का

मन करता है/
लपेटे हुए धुंध/
सोते रहें गंगा तीरे...

४.

सर्दी/ इस मौसम.
न केवल ठंढक.

सर्द, इसमौसम है/
मुरझाना मेरा.......

3 comments:

  1. ऊँचे बित्ता भर
    बिरवे
    फूटी बाली
    मन करता है
    रूक जाऊँ
    इन्हें पकने तक।
    ...सुंदर क्षणिका।

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  2. aap din par din behtar likhte jaa rahe hain..

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  3. @ devendra uncle and bhavana......many thanks.

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फिर क्यूँ मैं हूँ.....

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