Friday, October 18, 2013

तमाम रंग हैं उजले।

१. 

ज़रूरी नहीं,
मुझसे जुड़ना। 
मेरी सार्थकता, जीने की हिम्मत बची रहे तुझमे। 

२. 

तमाम रंग हैं उजले। 
अंधेरे की, हिस्सेदारी रहने दो मेरी।  

३. 

मुद्दतों बाद मिलेंगे, पहचान लेना 
सूरत मेरी,
बदलती रहती। रहता मैं वहीँ स्थिर। 

3 comments:

  1. blog ka naya look achha hai .. bright and spacious .. baaki aapki kavitaayein aajkal bahut complicated hoti jaa rahi hain .. lagta hai ki jaldi hi aapko koi award mlega

    ReplyDelete
  2. ha ha ha.... award.. sahi udaai hai...

    ReplyDelete
  3. अँधेरे की हिस्सेदारी रहने दो मेरी...

    बहुत ही सुन्दर, बहुत उम्दा...

    ReplyDelete