Saturday, March 2, 2013

अंधकार

१.

रात कई गुज़री,
लगता है आज फिर,
नहीं सुबह कोई।
मेरा कोई अंत नहीं।

२.

अंधकार,
डराता है पहले।
डर लगता है,
उजाले से फ़िर।





1 comment:

  1. dar lagata hai,
    ujaale se fir...
    behatareen rahana Rajani bhaiya.

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