ख़याल कई,
नहीं बांटे ॥
बताया तो था, तुमको
भोर की ओस, छूने की कशिश,
चाहत मोर पंखों की,
ख्वाब, नीले धुनों पर थिरकन ॥
नहीं बताया कभी
डर, झांकते कुँए में गिरने का
भय, चलती ट्रेन से कूद जाने का
दुह्स्वप्न आत्महत्या का
तुमने भी तो छिपाया, मुझसे
जो न, बांटो
घट जाता है ॥