Friday, June 14, 2013

ख़याल कई

ख़याल कई,  
नहीं बांटे ॥  

बताया तो था, तुमको 
भोर की ओस, छूने की कशिश, 
चाहत मोर पंखों की, 
ख्वाब, नीले धुनों पर  थिरकन ॥ 

नहीं बताया कभी 
डर, झांकते कुँए में गिरने का 
भय, चलती ट्रेन से कूद जाने का 
दुह्स्वप्न आत्महत्या का  
तुमने भी तो छिपाया, मुझसे 

जो न, बांटो 
घट  जाता है ॥ 

Thursday, June 13, 2013

शुरू के चन्द चक्कर

शुरू के चन्द चक्कर 
लोग कहते हैं, हैं 
मुश्किल । 

हर सुबह ही , बस 
दुश्वारी 
दिन कट जाता है ।  

कुछेक चक्कर बाद 
पाँव खुदबखुद खींचते खुद को 
दिन ढो लेता है. 

सुबह की दौड़ औ ज़िन्दगी 
धकेल रहे खुद को 
चंद  चक्कर बाद 
रुक जाता हूँ 
रोज़ 
मशीनी दौड़ से आजिज़ आ,

बेशर्म ज़िन्दगी 
हर सुबह 
वही तमाशा करती ॥ 

रोज़ ही दौड़ने जाता हूँ  
मैं ॥  

Tuesday, June 11, 2013

अंत हुआ 
इसतरह 
अनंत का ॥ 

आशा ने दामन छोड़ा 
ख़त्म हुई 
निराशा ॥ 

नहीं  पता 
पर 
अभाव है, शून्य 
या पूर्णता मेरी ॥. 
ख़त्म हो जाता है / सचमुच,सबकुछ  / रह जाता है, / फिर भी मैं  ॥  परे, सन्नाटे के / नहीं आवाज़ / कोई / न ख्वाब,न क़त्ल उनका / खडा मिलता है / आतप्त  मैं  ॥ 

Monday, June 10, 2013

बुनता रहा मैं 
गीत । 

मेरे अनजान 
ही, 
चखते रहे 
मुझको 
गीत मेरे । 

चीरा मुझको 
मुझी से, पेट भरा 
रक्तस्नान कर 
शुद्ध हुए 
गीते मेरे । 

उन्ही शब्दों ने जिया मुझको 
जिनकी चौखट 
आसरा थी मेरी । 

प्रेम 
निर्लज्ज 
घृणा 
लज्जा । 

तार तार 
खुली, बुनाई 
मेरी ॥ 

Saturday, June 8, 2013

मेरा स्थिरपन  
नहीं  विस्मय  
चकित करता है 
मुझ तक पहुच जाना तेरा      

Wednesday, June 5, 2013

मैं हुआ  ठंढा 
लावा अन्दर नहीं जमता 
बादलों के कई घेरे 
मुझको घेरे 
मन फिर भी दहकता 

१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...