Tuesday, April 9, 2019

उदास रात, बस तुझे याद करता हूँ।

उदास रातों को, गुदगुदाते नहीं ख्वाब
चांदनी झरती नहीं
न खिलता है हरसिंगार।
उदास रात,
बस तुझे याद करता हूँ।
उदास रातों को और उदास कर जाती हो तुम।

तू मालिक है, भेड़ हैं हम.

जादू है,
तेरा व्यंग, तेरी मुस्कान
तेरा सोना, तेरा रोना
तू मालिक है
भेड़ हैं हम। तेरे जादूई दुनिया की भेड़े।
भेड़ हैं हम, तेरे बाड़े में चरती
तेरी संगत में भेड़िया धसान करती।।

तुम पर खत्म हो जाती है, कविता।

1
लिखता हूँ
मिल जाती है तेरी देह से कविता
पास राह जाती है, गंध तेरी।
2
कभी लिख नही सका,
खुशनुमा तुम्हारे जैसा कुछ।
3
तुम पर खत्म हो जाती है, कविता।

Saturday, September 3, 2016

जबकि मौन हो तुम
मैं पढ़ रहा हूँ, भाषा
उग आई दीवार इक, गिर पड़ी है।  तक़रीबन।

२.
जबकि शांत चुप चाप हो तुम
मैं गिन रहा हूँ, लहर
संयत स्वर में, रागिनी घुल गयी है। मधुर।

३.
अब जबकि  बेचैन हो तुम
मैं माप रहा, दूरी
परे समय के, रच रहे साथ हम। हरदम।    

Friday, June 5, 2015

पुनः पुनः

१. 
दिन ढला 
पुनः पुनः 
शाम से रात ही, समय का सफर। 

२. 

इंतज़ार 
पुनः इंतज़ार 
तुमसे मिलना ही, एकमेव ख्वाहिश। 

३. 

छपाक छपाक 
उम्मीदों का सफर 
तैरता मैं अंतहीन। 

Saturday, January 17, 2015

तुम्हारी कटान है या हीरे की आरी।

१. 
नशा ही नहीं,
खूबसूरत भी। 
अफीम है तो मज़ेदार।

२. 

इस पार से या उस पार से
परदा हटे तो 
दीदार भी हो। 

३. 

बहुत बारीक़ 
बहुत तेज़ 
तुम्हारी कटान है या हीरे की आरी। 

४. 

पसीना भी अच्छा 
फेरोमोन्स 
और स्वाद रंगीन। 

५. 

नमक इश्क़ का 
बेमुरौवत फीका 
चटक वासना की डली। 

Sunday, January 11, 2015

१. 

सिरों के परे, दिखती दुनिया विशाल,
सिरों  मध्य मैं झूला। 

२. 

अटक गया मध्य कहीं मैं,
ज़िन्दगी है कि डमरू कोई। 

३. 

दोनों छोर खुले  हुए 
कई कई छेदों से बजता मैं। 


१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...