Monday, June 10, 2013

बुनता रहा मैं 
गीत । 

मेरे अनजान 
ही, 
चखते रहे 
मुझको 
गीत मेरे । 

चीरा मुझको 
मुझी से, पेट भरा 
रक्तस्नान कर 
शुद्ध हुए 
गीते मेरे । 

उन्ही शब्दों ने जिया मुझको 
जिनकी चौखट 
आसरा थी मेरी । 

प्रेम 
निर्लज्ज 
घृणा 
लज्जा । 

तार तार 
खुली, बुनाई 
मेरी ॥ 

Saturday, June 8, 2013

मेरा स्थिरपन  
नहीं  विस्मय  
चकित करता है 
मुझ तक पहुच जाना तेरा      

Wednesday, June 5, 2013

मैं हुआ  ठंढा 
लावा अन्दर नहीं जमता 
बादलों के कई घेरे 
मुझको घेरे 
मन फिर भी दहकता 

Sunday, May 5, 2013

इंतज़ार

इंतज़ार 
उस  एक पल का
बंद कर दोगे तुम,
प्यार करना।

मुक्त हो जाओगे 
तुम,
बंद कर दोगे 
नफरत भी।

Sunday, April 21, 2013

एक दिन और

१. 

एक दिन और 
पुनः एक दिन 

ज़िन्दगी खींच रहा।

एक दिन और, 
कोई तोहमत न आए तुझपर।

२. 

तुम्हे शिकायत है,
चाल चलन से मेरे।

मुझे पता है,
तुम्हे मेरी आदत नहीं।

३. 

इंतज़ार है मुझको 
तेरे लिए, या तुझको भी

बंद कर दोगे तुम 
प्यार मुझसे।

मुक्त मुझसे, मिले
तुझे धरती, आकाश तेरा। 



Thursday, March 14, 2013

ख़ुदा, बिलकुल तेरे जैसा..


१. 

ऊँचा और ऊँचा 
खुद के रहने की जगह ,
ख़ुदा,  बिलकुल तेरे जैसा। 
मैनें भी चुनी है जगह 
क़त्ल हुआ था जहां। 

२ .

समतल ही फैला
नहीं सहारा कोई चढ़ने को,
कुचला गया कदमों तले 
घास,
तुझ जैसा नरम चारा मैं।

३. 

परछाईं मेरी,
तुझ जैसा ही मैं।
महसूस नहीं ,मैं 
किसी छुअन को भी।
अपनी परछाईं भर, मैं।

Saturday, March 2, 2013

अंधकार

१.

रात कई गुज़री,
लगता है आज फिर,
नहीं सुबह कोई।
मेरा कोई अंत नहीं।

२.

अंधकार,
डराता है पहले।
डर लगता है,
उजाले से फ़िर।





१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...